Monday, 15 July 2013

बाबा जी एक रोशनी देते हैं


बाबा जी एक रोशनी देते हैं

जेल में मैं कुछ नहीं बोलता था तो लोग कहते थे कि ये कुछ नहीं बोलते। मैं निरक्षर भट्टाचार्य जब लोगों ने पूछा तो कुछ बता दिया। जानता बूझता तो कुछ नहीं पर सत्य अपनी जगह पर है। बाबा जी एक रोशनी देते हैं। भौतिक वस्तुओं से प्रेम करके आध्यात्मिकता में घटा लीजिए। देश के अधिकारी यह समझें कि ये हमारे बच्चे हैं। बच्चे गलती करें तो दो-चार तमाचे लगा देना तो ठीक है लेकिन उनके साथ दुव्र्यवहार किया जाऐगा और बच्चों को माता पिता का प्यार नहीं मिलेगा तब क्या होगा ? इसे समझने की कोशिश कीजिए। जब कोई झूठ, चोरी या और कोई अन्य खराब काम नहीं छोड़ता है तो अच्छे काम करने में क्या डर ? और आज इसी बात की जरूरत है देश में। मैंने किसी की कोई बुराई नहीं की अगर की हो तो आप बताईऐ। वैसे मैं किसी की बुराई नहीं करता हूं लेकिन यह जरूर कहता हूं कि जो कपड़ा आपका गन्दा हो गया है उसे आप धुलवा लीजिऐ। मुझे धोबी कहते हैं यह आपकी बुद्धि का दिवालियापन है। मैं आपकी दृष्टि, आपके अन्तःकरण, आपकी भावनाओं और आपकी आत्मा की सफाई करता हूं। मैं कपड़ा धोने वाला धोबी नहीं हूं। आप सब लोग बड़ी सावधानी से रहें। देश हित में लगे रहें, समाजहित में लगे रहें किसी को छेड़छाड़ करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर राज्य प्रजातंत्रवादी है तो देश का सारा काम ठीक होना चाहिऐ, सारी व्यवस्था ठीक होनी चाहिऐ। घबड़ाने की बात नहीं है बाबा जी का आपके साथ पूरा सद्भावना है। जनता ने सेवा करने का एक मौका दिया है उसकी इच्छा को पूरा होने दीजिऐ। मैं अनुरोध करूंगा आपसे किसी की कुछ बातें हों उसे आप सुनिए,लेकिन जितनी जरूरी चीजें हों उतना ही आप इनके सामने रखें, ऐसी बातें चुन लीजिऐ ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है।(शाकाहारी पत्रिका: 14 नवम्बर 1980)

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