Monday, 15 July 2013

भारत कर्मभूमि है



भारत कर्मभूमि है

कृष्ण ने कहा था कि भारत कर्मभूमि है। यहां आघ्यात्मवाद रहेगा, मानववाद रहेगा, भौतिकवाद नहीं चलेगा। इसे भोगभूमि मत बनाओ नहीं तो विनाश हो जाऐगा। इस भूमि से धर्म को कभी खत्म नहीं किया
जा सकता। धर्म को खत्म करने वाले स्वयं खत्म हो जाऐंगे। समय थौड़ा रह गया है। किसी महापुरूष की छत्रछाया में रहोगे तो अकाल मृत्यु से बच जाओगे। कलयुग जाने वाला है और सत्युग आने वाला है। दोनो के टकराव में महाभारत होगा फिर विनाश हो जाऐगा। कई सौ साल पहले सूरदास जी ने कहा था कि:


अकाल मृत्यु जगमाही व्यापै, परजा बहुत मरे।
काल ब्याल से वही बचे जो गुरू का ध्यान धरे।।


(शाकाहारी पत्रिकाः 1982)

0 comments:

Post a Comment