आगे भारी परेशानियां आयेंगी
बाबाजी ने अप्रैल 1971 में मलेशिया सिंगापुर आदि स्थानों की यात्रा की। पिनांग में अपना संदेश सुनाते हुए कहा कि अगद दुनियां के लोग धर्म की तरफ नहीं मुड़ते हैं तो आगे भारी परेशानियां आयेंगी, चाहे जमीन से आये या आसमान से आ जायें, चाहे पूरब से आयें या पश्चिम से आ जायें, लेकिन परेशानियां आयेंगी जरूरी और कोई इसे रोक नहीं सकता है। मलेशिया और सिंगापुर यात्रा के अनुभव सुनाते हुए उन्होंने कहा कि वहा की जनता में असीम राष्ट्र प्रेम है भारत के सम्बन्ध में वहा के निवासियों से पूछे जाने पर उन्हेने बताया कि भारत वासियों में राष्ट्रभक्ति नहीं है, वह एक चोरों का देश है और यही कारण है कि इतना विशाल देश होते हुए भी वह आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है। बाबाजी ने कहा कि उन्हें बताया गया कि भारत के लोगों का इतना पैसा वहा के बैंकों में जमा है कि अगर बता दिया जाये तो आखों से आंसू निकल आयें। अगर वो पैसा भारत में मॅंगा लिया जाये और लोग मेहनत ईमानदारी से काम करें तो पाच वर्षों के अन्दर भारत चमन बन सकता है। हिन्दुस्तान गरीब देश बिल्कुल नहीं है, इसे वहा के लेागेा ने गरीब बना रखा है। आगे समय में सारे विश्व में एक जनसंहार क्रान्ति होगी, जिसमें दुनियां की आबादी घटकर बहुत कम रह जायेगी। सारे विश्व के लेाग धर्म को मानने के लिए बाध्य होंगे और अमरीका और इग्लैण्ड के नर नारी भारत में हरे राम-हरे कृष्ण का कीर्तन करते मिलेंगे, पुरुष हिन्दुओं की तरह चोटी रखेंगे और स्त्रियां भारतीय नारियों की तरह साड़ियां पहनेंगी। भारत की तरह सभी देशों के लोग शाकाहारी बनेंगे। मैं सन् 1972 तक भारत में 20 करोड़ नर नारियों का जागरण कर दूगा जो प्रेम, सेवा, धर्म और ईश्वर भक्ति में विश्वास करेंगे और भारतीय संस्कृति की ध्वजा ऊची करेंगे। मैं लोगों को नामदान "दीक्षा" देकर सबसे भजन कराऊँगा और जीवात्माओं को स्वर्ग, वैकुण्ठ, विष्णुलोक, साकेत लोग, गौलोक में पहुचाऊगा। मरने के पहले ही ईश्वर का, खुदा का, गाॅड का दीदार होता है । जीवात्मा की आख, तीसरा नेत्र "थर्ड आई" खुला है। लेकिन शर्त यह है कि आपको मास, मछली, शराब का सेवन छोड़करके रोज दो-तीन घण्टे ईश्वर की प्राप्ति के लिए साधना "मैडीटेशन" में समय देना होगा।
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