दिल्ली में झण्डा फहराया जा चुका है
दिल्ली में झण्डा फहराया जा चुका है और नया अध्याय प्रारम्भ हो चुका है जो इसके इतिहास का अनूठा पृष्ठ बनेगा। धर्म की किरण यहां से फूट चुकी है। बाबा जयगुरूदेव जी ने सन 70 में दिल्ली के रामलीला मैदान में हजारों साईकिल यात्रियों के समक्ष कहा कि हमने 1972 तक देश में बीस करोड़ नर-नारियों का जागरण करने का व्रत लिया है। हमने शाकाहारी सदाचारी बनकर पुराने ऋषि-मुनियों व महात्माओं के आदर्शों की मशाल जलाकर पुनः विश्व में एक प्रकाश देना है नहीं तो एक एैसा भी समय आने वाला है जहां आदमी को आदमी उठाने वाला नहीं मिलेगा। बाबाजी ने अपने व्रत को दुहराया और कहा कि बिना किसी आंदोलन के देश में गऊ काटना बन्द हो जाऐगा, राष्ट्र भाषा हिन्दी और संस्कृत हो जाऐगी। जो कुछ भी मैं कहूगा वो सब देखने को मिलेगा। भविष्य में शासन की बागडोर धार्मिक लोगों के हाथों में चली जाएगी। मेरी सौ बातें पूरी होने पर देश खुशहाल हो जाएगा। भारत के ऊपर विदेशी शासन नहीं हो सकता, भारत अखण्ड राज्य होगा। ऐसा संभव हो सकता है कि दूसरे देश वाले यहां भारत में गोले बरसा दें जिससे नई-नई बिमारियां फैल जाऐं और करोड़ों लोग मर जाऐं। ऐसा भी हो सकता है कि सभी लोग आपस में लड़ जाऐं और काफी जन संख्या समाप्त हो जाए या भूचाल आऐ और इमारतें 40-50 फीट ऊपर आसमान में उछल जाऐं और लोग दबकर मर जाऐं। यह सभी कुछ संभव है परन्तु अब भारत के ऊपर किसी दूसरे देश का शासन नहीं हो सकता। भारत राम और कृष्ण की भूमि है। इस तपोभूमि में रहकर जो लोग आतंक पैदा करेगंे, अन्याय करेंगे, जनता के पैसों को औतिक रूप से जमा करसुख और आराम की कल्पना करेंगे, मास, मछली, अण्डा, शराब का सेवन करेंगे उनके लिए आगे एक ऐसा समय आ रहा है कि आदम िको आदमी उठाने वाला नहीं मिलेगा। जो तकलीफें आगे आ रही हैं उन्हें कोई मेट नहीं सकता। अगर पृथ्वी के कण-कण में सोना बरसा दिया जाऐ तब भी लोगों को सुख नहीं मिलेगा। यह तकलीफ व्यक्तिगत रूप से होगी और कर्मानुसार होगी। 1970
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