Monday, 15 July 2013

आने वाले समय में तकलीफों की



आने वाले समय में तकलीफों की

आने वाले समय में तकलीफों की अंाधी चलेगी। अपना समय बर्बाद मत करो। जहां कहीं भी मौका लगे गृहस्त आश्रम में रहते हुऐ दो मिनट, चार मिनट, दस मिनट, भगवान का नाम लेने लगो। इनकी-उनकी निन्दा आलोचना से क्या फायदा? क्या फायदा
इससे कि ये खराब, वो खराब, कांग्रेस खराब, जनसंघ खराब। इन सब बातों से कोई फायदा होने वाला नहीं है। सब लोग अपनी तरफ देखने लगो तो अपनी जगह पर सब ठीक हो जाऐंगे। यदि हम व्यक्ति विशेष अपनी अपनी तरफ देखने लगें तो दुनियां में सब ठीक हो जाऐगा कामराज, रामराज, सेवाराज, कल्याणराज आ जाऐ पर जब तक हम अपनी तरफ नहीं देखेंगे, दूसरों की तरफ देखते रहेंगे तब तक काम होने वाला नहीं है। कोई आदमी किसी का एैब छुड़ाने के लिए तैयार नहीं है पर कहीं यदि सच्चे रास्ते पर ले चलना हो तो हजारों बातें खड़ी हो जाती हैं। और हिन्दू धर्म? दया का धर्म था, हिन्दू धर्म ईमान का धर्म था। यह तो बहुत बड़ा शक्तिशाली धर्म था उसको टुकड़ों में बांट दिया और विभिन्न प्रकार के मतभेद पैदा कर दिये सब एक दूसरे पर हमला करने लगे। क्या यही हिन्दू धर्म है? मुसलमान फिर भी अच्छे हैं हिन्दुआंे से। वो कहते हैं कि ’इसलाम खतरे में है’ तो सब एक। वैसे चाहे जो भी वो करते हों पर मजहब के नाम पर सब एक सूत्र मे बंध जाते हंै। पर हिन्दू धर्म? यहां तो हिन्दू धर्म के नाम पर कोई खड़ा भी नहीं होता। इसी वजह से ये तकलीफ आई। अभी क्या तकलीफ है, तकलीफ तो आगे आ रही है। तकलीफों की आंधी चलेगी। हम जो कुछ भी कहेंगे वह हमारी बात भविष्य में ज्यों की त्यों होंगी। इसे हिन्दुस्तान का कोई भी व्यक्ति, कोई पण्डित, कोई मुल्ला काट नहीं सकता है। (1981)

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