UJJAIN:-BABA JAIGURUDEV MANDIR आगे आप की मर्जी है।

बाबा जी का कहना हैं ,शाकाहारी रहना हैं। तन मन करता कौन ख़राब ! अंडा,मछली,मांस,शराब। क्या खाने से होगी भलाई ! साग,सब्जी,दूध,मलाई। कुदरत हैं तैयार खड़ी ! आगे तबाही बड़ी-बड़ी। बाबा जी की अर्जी हैं ! आगे आप की मर्जी है।

BABA JI KA KAHNA HAI SHAKAHARI RAHNA HAI

बाबा जी का कहना हैं ,शाकाहारी रहना हैं। तन मन करता कौन ख़राब ! अंडा,मछली,मांस,शराब। क्या खाने से होगी भलाई ! साग,सब्जी,दूध,मलाई। कुदरत हैं तैयार खड़ी ! आगे तबाही बड़ी-बड़ी। बाबा जी की अर्जी हैं ! आगे आप की मर्जी है। .

SATSANG IN UJJAIN

बाबा जी का कहना हैं ,शाकाहारी रहना हैं। तन मन करता कौन ख़राब ! अंडा,मछली,मांस,शराब। क्या खाने से होगी भलाई ! साग,सब्जी,दूध,मलाई। कुदरत हैं तैयार खड़ी ! आगे तबाही बड़ी-बड़ी। बाबा जी की अर्जी हैं ! आगे आप की मर्जी है। .

SWAMI JI MAHARAJ (BABA JAIGURUDEV)

बाबा जी का कहना हैं ,शाकाहारी रहना हैं। तन मन करता कौन ख़राब ! अंडा,मछली,मांस,शराब। क्या खाने से होगी भलाई ! साग,सब्जी,दूध,मलाई। कुदरत हैं तैयार खड़ी ! आगे तबाही बड़ी-बड़ी। बाबा जी की अर्जी हैं ! आगे आप की मर्जी है। .

SHAKAHARI BANO OR BANAO

बाबा जी का कहना हैं ,शाकाहारी रहना हैं। तन मन करता कौन ख़राब ! अंडा,मछली,मांस,शराब। क्या खाने से होगी भलाई ! साग,सब्जी,दूध,मलाई। कुदरत हैं तैयार खड़ी ! आगे तबाही बड़ी-बड़ी। बाबा जी की अर्जी हैं ! आगे आप की मर्जी है। .

Monday, 15 July 2013

बाबा जी एक रोशनी देते हैं


बाबा जी एक रोशनी देते हैं

जेल में मैं कुछ नहीं बोलता था तो लोग कहते थे कि ये कुछ नहीं बोलते। मैं निरक्षर भट्टाचार्य जब लोगों ने पूछा तो कुछ बता दिया। जानता बूझता तो कुछ नहीं पर सत्य अपनी जगह पर है। बाबा जी एक रोशनी देते हैं। भौतिक वस्तुओं से प्रेम करके आध्यात्मिकता में घटा लीजिए। देश के अधिकारी यह समझें कि ये हमारे बच्चे हैं। बच्चे गलती करें तो दो-चार तमाचे लगा देना तो ठीक है लेकिन उनके साथ दुव्र्यवहार किया जाऐगा और बच्चों को माता पिता का प्यार नहीं मिलेगा तब क्या होगा ? इसे समझने की कोशिश कीजिए। जब कोई झूठ, चोरी या और कोई अन्य खराब काम नहीं छोड़ता है तो अच्छे काम करने में क्या डर ? और आज इसी बात की जरूरत है देश में। मैंने किसी की कोई बुराई नहीं की अगर की हो तो आप बताईऐ। वैसे मैं किसी की बुराई नहीं करता हूं लेकिन यह जरूर कहता हूं कि जो कपड़ा आपका गन्दा हो गया है उसे आप धुलवा लीजिऐ। मुझे धोबी कहते हैं यह आपकी बुद्धि का दिवालियापन है। मैं आपकी दृष्टि, आपके अन्तःकरण, आपकी भावनाओं और आपकी आत्मा की सफाई करता हूं। मैं कपड़ा धोने वाला धोबी नहीं हूं। आप सब लोग बड़ी सावधानी से रहें। देश हित में लगे रहें, समाजहित में लगे रहें किसी को छेड़छाड़ करने की कोई जरूरत नहीं है। अगर राज्य प्रजातंत्रवादी है तो देश का सारा काम ठीक होना चाहिऐ, सारी व्यवस्था ठीक होनी चाहिऐ। घबड़ाने की बात नहीं है बाबा जी का आपके साथ पूरा सद्भावना है। जनता ने सेवा करने का एक मौका दिया है उसकी इच्छा को पूरा होने दीजिऐ। मैं अनुरोध करूंगा आपसे किसी की कुछ बातें हों उसे आप सुनिए,लेकिन जितनी जरूरी चीजें हों उतना ही आप इनके सामने रखें, ऐसी बातें चुन लीजिऐ ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है।(शाकाहारी पत्रिका: 14 नवम्बर 1980)

सभी सत्संगी विशेष ध्यान दें


सभी सत्संगी विशेष ध्यान दें

सभी सत्संगी जो सन्त मत की साधना में लगे हैं जानना चाहिऐ कि संतमत के क्या-क्या नियम हैं। उन नियमों को मानने की इसलिए
जरूरत पड़ती है कि जिस समाज में हम लोग रहते हैं ओर काम करते हैं उसकी पूरी जानकारी और पूरा ज्ञान हमको हो जाऐ ताकि हम फंसे नहीं। ज्ञानशून्य होने पर तुम फंस जाओगे। सन्तमत में जो प्रेमी साधना करते है वे सन्तमत के नियमों को भली प्रकार से पका लेते हैं, समझ लेते हैं, बुद्धि में जमाऐ रहते हैं ताकि साधन में विध्न बाधा न पड़े, फंसे नहीं और साधन-भजन न छूटे। इसलिए नियमों को जानने की जरूरत है साधक साधना में चलते रहते हैं, समझते रहते हैं नहीं तो साधना शून्य सी रहती है और कुछ देखा नहीं। इतने दिन सत्संग सुनते हो गऐ हर विषय पर, हर भावनाओं का और हर कामों का ऊंचा-नीचा सबकुछ सत्संग में सुनने को मिला। सत्संग को इतनी समझदारी से पीना चाहिए ताकि अजीर्ण न हो। पी ला, घोट लो और पचाओ। सन्तमत की साधना, उपासना भावभक्ति सेवा और प्रेम सब समझ आ जाऐगा। सुरत शब्द की बात भी समझ में आऐगी। जो नहीं समझते हैं वह अधकचरे रह जाते हैं। इसलिए सत्संग की जरूरत पड़ती है ताकि घोर अज्ञानता से निकालकर सीधे साधना में लग सके।

दूसरी बात यह कि सतपुरूष ऐसे दया नहीं करगें और न उनके नीचे के लाकों के ब्रम्ह, पारब्रम्ह और निरंजन ही ऐसे दया करेंगे। ऐसा सिलसिला और वसीला बना है कि जो उधर से आऐ, इधर से जाऐ और वह उनसे मिला है वही दया दे सकता है। जो नहीं मिला है वह दया नहीं दे सकता हैं। सन्त आते हैं तब सतपुरूष की दया होती है वैसे नहीं। इसलिए तो गुरू के लिए जोर दिया गया है। उसके आगे सबने कलम बन्द कर दी।(शाकाहारी पत्रिका: 7 दिसम्बर 1980)

बाबा जयगुरूदेव की अपील मानवमात्र इन्सानों से


बाबा जयगुरूदेव की अपील मानवमात्र इन्सानों से



वर्तमान राजनीतिक आलोचना देरूा व जनता के लिए घातक। शासक आदमी है फरिश्ते नहीं। बाबा जयगुरूदेव ने कहा कि वर्तमान शासक आदमियों को दिल्ली में काम करने दें, आलोचना न करें क्योंकि आलोचना से काम करने वालों का मस्तक ऊक-चूक हो जाता है। जब मस्तक बिगड़ गया तो कोई काम सही नहीं होता है। सही काम भी गलत दिखाई देता है।

बाबा जयगुरूदेव ने कहा कि मुझे तो सम्पूर्ण देश की जनता के हितों को देखना है न कि प्रधानमन्त्री। जहां प्रधानमन्त्री सम्पुर्ण देश। बाबा जयगुरूदेव ने देशभक्तांे से अपील की कि देश भक्त जनता के हितों को देखें न कि कुर्सी को और किसी की आलोचना न करें। आलोचना से देशभक्तों की शक्ति क्षिण होती है और मानवता की गरिमा जाती रहती है, वाणी में अशुद्धता आती है, जनता में अविश्वास आता है। देश में जो नाजुक दौर-दौरा जनता के दुःखों का चल रहा है इसमें बहुत संख्या में किसान पीड़ित हैं। यह रोग मलेरिया और इनफलूएन्जा का फैल गया है। ऐसा अनुमान होता है कि थौड़े दिनों में टाइफाइड की शक्ल ले लेगा। इसका सही उपचार नहीं किया गया तो अन्त में सन्नीपात हो जाऐगा। ऐसी अवस्था में अनुभवी वैद्य की जरूरत है। रोगी को वैद्य की जरूरत पड़ेगी, न्याय के लिए न्यायाधीश चाहिऐ, पत्नी को पति की जरूरत पड़ेगी, विद्यार्थी को अध्यापक जरूर चाहिऐ, प्रजा बिन राजा के नहीं रह सकती है, राजा को सलाह के लिए राजगुरू अवश्य चाहिऐ। मन्त्री राजगुरू का काम नहीं कर सकता। राजगुरू जनता की कुंजी है। राजगुरू राजा को सलाह नहीं दे सकते फिर योगियों की जरूरत पड़ेगी।

बाबा जयगुरूदेव जी ने फिर जोरदार शब्दों में अपील की कि जनता जनार्दन के हितों के लिए वर्तमान शासक या आने जाने वाले शासक इन सबकी आलोचनाओं का आदान-प्रदान बन्द कर दें। वास्तव में अगर जनता का हित चाहतें हैं तो जनता व देश हित के लिए सरकार को सलाह दें। हमारी सलाह और सहयोग से सरकार कुछ नहीं कर पाती तो आगे भगवान कर्ताधर्ता है, कुछ ईश्वर पर भी विश्वास करो। मनुष्य का कर्तव्य यह है कि ईमानदारी व मेहनत के साथ दुकान-दफतर का काम करें, शाम को बच्चों की सेवा। आधा-पौना घण्टा भगवान का भजन करें। मुसलमान खुदा की इबादत करें, ईसाई गाॅड की प्रार्थना करें सारी समस्याऐं सुलझती दिखाई देंगी। बाबा जयगुरूदेव तो आपके सामने हैं।(27 दिसम्बर 1980)

एक अपील, एक अनुरोध जनता से

एक अपील, एक अनुरोध जनता से


मैं प्रार्थना करता हूं देवताओं से कि सबको सद्बुद्धि दीजिऐ। कुदरत की लीला का आपको कुछ कुछ भान होने लगा है। भारत की जनता से
अनुरोध करता हूं कि अस्सी फीसदी जनता सत्युग िढ़ंढ़ोरे का मौका दे दे और सहयोग दे। अपने खेत की तरफ ध्यान रखें। मैं इधर से उधर से, देवताओं से, अग्नि, वायु और आकाश और आप से भी काम चाहता हूं। सावधानी के साथ भारत की जनता की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। देश के जिम्मेदार प्रतिनिधियों से भी हमारा अनुरोध है कि हमारा सहयोग दें हम आपका काम करेंगे। हमारी मदद कीजिऐ। हमारी और आपकी मदद से काम हो जाऐगा। आप भी चाहते हैं आराम मिले। हम भी चाहते हैं कि सबको आराम मिले। जब सबकी आकांक्षा एक है तो हम सबको एक नई सड़क बनाकर चलना और चलाना हैं। मानेंगे तो ठीक, नहीं मानते तो आप जानें और आप का काम जानें। सतयुग आऐगा इसको कोई रोक नहीं सकता।(शाकाहारी पत्रिका: 14 मार्च 1981)

बाबा जी का पैगाम


बाबा जी का पैगाम




इन माताओं के गर्भ से कुछ ऐसे बच्चों का अवतार हो गया है जो आपको सीधा करेंगे, दिल्ली वालों को भी सीधा करेंगे। वो बच्चे इन माताओं के गर्भ से आ गऐ और उसका ज्ञान आपको थोड़े दिनों में होने वाला है। उनका संकेत हर प्रांतों में हम कर देंगे। हमारी आवाज के साथ हमारी पत्रिका बनेगी और जहां तक ये हवा जाऐगी वहां तक यह पत्रिका जाऐगी और वह हवा आपमें प्रवेश कर जाऐगी। सब जगह घूम घूमकर यह हवा हम पहुँचा देंगे। औतारी शक्तियों का एक पूरा समाज एक पूरी नाट्यशाला उतरी हुई है जो यहां काम करेगी। यह संकेत हम पहले से ही आपको दे रहे हैं। वक्त का इन्तजार तो करना ही पड़ता है।(1967)

भारत कर्मभूमि है



भारत कर्मभूमि है

कृष्ण ने कहा था कि भारत कर्मभूमि है। यहां आघ्यात्मवाद रहेगा, मानववाद रहेगा, भौतिकवाद नहीं चलेगा। इसे भोगभूमि मत बनाओ नहीं तो विनाश हो जाऐगा। इस भूमि से धर्म को कभी खत्म नहीं किया
जा सकता। धर्म को खत्म करने वाले स्वयं खत्म हो जाऐंगे। समय थौड़ा रह गया है। किसी महापुरूष की छत्रछाया में रहोगे तो अकाल मृत्यु से बच जाओगे। कलयुग जाने वाला है और सत्युग आने वाला है। दोनो के टकराव में महाभारत होगा फिर विनाश हो जाऐगा। कई सौ साल पहले सूरदास जी ने कहा था कि:


अकाल मृत्यु जगमाही व्यापै, परजा बहुत मरे।
काल ब्याल से वही बचे जो गुरू का ध्यान धरे।।


(शाकाहारी पत्रिकाः 1982)

बाबा जी का कहना हैं ,शाकाहारी रहना हैं।


बाबा जी का कहना हैं ,शाकाहारी रहना हैं।


बाबा जी का कहना हैं ,शाकाहारी रहना हैं। 

तन मन करता कौन ख़राब !
 अंडा,मछली,मांस,शराब। 

क्या खाने से होगी भलाई !
  साग,सब्जी,दूध,मलाई। 

कुदरत हैं तैयार खड़ी ! 
आगे तबाही बड़ी-बड़ी।

 बाबा जी की अर्जी हैं !
 आगे आप की मर्जी है।

राम ने बाली को बहुत समझाया


राम ने बाली को बहुत समझाया


राम ने बाली को बहुत समझाया था पर जब वो नहीं माना तो क्या हुआ इतिहास साक्षी है। मन्दोदरी ने रावण को बहुत समझाया कि राम भगवान हैं उन्हें तुम इन्सान मत समझो पर रावण ने अपने अहंकार में नहीं समझा तो क्या हुआ ये सब लोग जानते हैं। भस्मासुर ने भगवान शंकर से ही वरदान लिया था कि जिसके सिर पर हाथ रखेगा वह जल जाऐगा। उसको ये वरदान मिला तो उसने शंकर भगवान के सिर पर ही हाथ रखने की कौशिश की लेकिन अपने अहंकार , मोह में और काम के वशीभूत अपने ही सिर पर हाथ रख लिया और अपना अन्त कर दिया।राम ने जब रामेश्वरम में शिव की स्थापना की तो ब्राहमण होने के कारण रावण को भी बुलाया। रावण विद्वान था, वह जानता था कि बिना सीता के गए राम की पूजा नहीं होगी। इसलिए वह सीता को लेकर गया। राम ने ब्राहमण अतिथी के रूप में रावण के पैर पूजे। रावण ने राम को आशीर्वाद दिया कि तुम अजेय होगे, तुम्हें कोई जीत नहीं सकता।अगर कोई अपनी कुल्हाड़ी से अपना ही पैर काट ले तो क्या कर सकते हैं राम, क्या कर सकते हैं महात्मा?

ईसा मसीह के साथ अन्त में सात शिष्य खड़े थे। जिस समय उनको शूली पर चढ़ाया जाने लगा तो सब शिष्य खड़े थे। उनसे पूछा गया कि तुम ईसा मसीह को जानते हो ,तो सब इन्कार कर गऐ। अगर किसी एक ने भी कह दिया होता कि मैं जानता हू तो आज उसके गिर्जाघर बन गऐ होते, उसकी पूजा हो गई होती। मैंने कहा था कि मुसलमान आपस में लडंेगे वो स्थिती सामने आती जा रही है। जो कुछ भी कहा है वो सब आपको देखने को मिलेगा। (1981)

आने वाले समय में तकलीफों की



आने वाले समय में तकलीफों की

आने वाले समय में तकलीफों की अंाधी चलेगी। अपना समय बर्बाद मत करो। जहां कहीं भी मौका लगे गृहस्त आश्रम में रहते हुऐ दो मिनट, चार मिनट, दस मिनट, भगवान का नाम लेने लगो। इनकी-उनकी निन्दा आलोचना से क्या फायदा? क्या फायदा
इससे कि ये खराब, वो खराब, कांग्रेस खराब, जनसंघ खराब। इन सब बातों से कोई फायदा होने वाला नहीं है। सब लोग अपनी तरफ देखने लगो तो अपनी जगह पर सब ठीक हो जाऐंगे। यदि हम व्यक्ति विशेष अपनी अपनी तरफ देखने लगें तो दुनियां में सब ठीक हो जाऐगा कामराज, रामराज, सेवाराज, कल्याणराज आ जाऐ पर जब तक हम अपनी तरफ नहीं देखेंगे, दूसरों की तरफ देखते रहेंगे तब तक काम होने वाला नहीं है। कोई आदमी किसी का एैब छुड़ाने के लिए तैयार नहीं है पर कहीं यदि सच्चे रास्ते पर ले चलना हो तो हजारों बातें खड़ी हो जाती हैं। और हिन्दू धर्म? दया का धर्म था, हिन्दू धर्म ईमान का धर्म था। यह तो बहुत बड़ा शक्तिशाली धर्म था उसको टुकड़ों में बांट दिया और विभिन्न प्रकार के मतभेद पैदा कर दिये सब एक दूसरे पर हमला करने लगे। क्या यही हिन्दू धर्म है? मुसलमान फिर भी अच्छे हैं हिन्दुआंे से। वो कहते हैं कि ’इसलाम खतरे में है’ तो सब एक। वैसे चाहे जो भी वो करते हों पर मजहब के नाम पर सब एक सूत्र मे बंध जाते हंै। पर हिन्दू धर्म? यहां तो हिन्दू धर्म के नाम पर कोई खड़ा भी नहीं होता। इसी वजह से ये तकलीफ आई। अभी क्या तकलीफ है, तकलीफ तो आगे आ रही है। तकलीफों की आंधी चलेगी। हम जो कुछ भी कहेंगे वह हमारी बात भविष्य में ज्यों की त्यों होंगी। इसे हिन्दुस्तान का कोई भी व्यक्ति, कोई पण्डित, कोई मुल्ला काट नहीं सकता है। (1981)

जहां सत्य है वहीं धर्म है


जहां सत्य है वहीं धर्म है

भौतिकवाद कहते हैं भोगी दुनियां को। भौतिकवाद में अच्छे शब्दों की जरूरत नहीं, भले-बुरे का ज्ञान नहीं, किसी की पहचान की जरूरत नहीं। ऐसे भौतिकवादियों और भौतिक भोगियों ने धर्म को शहरों से मारकर जंगलों में भगा दिया। यदि धर्म रहता तो कुछ अंकुश आंखें पर होता, कुछ अंकुश वाणी पर होता, कुछ अंकुश सोचने-विचारने पर और कहने-सुनने पर होता। जहां अंकुश रहता है वहीं सत्य रहता है। जब सत्य रहता है तब वहीं धर्म रहता हैं। धर्म का अंकुश उठ गया तो कोई विवेक नहीं, किसी की कोई पहचान नहीं, देखने समझने की कोई शक्ति नहीं। लेकिन यह सत्य है कि वह किसी न किसी रूप में हर युग में रहा और अब भी है। इतिहास साक्षी है कि जब द्रोपदी का चीर हरण हुआ तो उस शक्ति ने अपना परिचय दिया। जब प्रहलाद पर अत्याचार हुआ तब भी उसने अपना परिचय दिया। जब-जब भक्तों पर संकट आऐगा तब तब वो अपना परिचय देगा। जब जब बाबा जी कहते हैं कि सबको भोजन, सबको कपड़ा, सबको मकान और सबको रोजी मिलेगी तो आप जबान गंदी क्यों करते हो? आप यह सोचो कि काम चाहे कोई भी करे लाभ हमको हो और सबको हो। फिर मैंने तो कहा है कि सबको लाभ होगा। बाबा जी ने बड़ी मैहनत की है और अब भी कर रहे है। वक्त का इन्तजार करो। वक्त का इन्तजार राम ने किया, कृष्ण ने किया और मैं भी कर रहा हू। याद रखो कि जमाना बदलेगा, अवश्य बदलेगा इसे कोई रोक नहीं सकता। (1981) संकलनकर्ताः पिं

एक अपील भारत वासीयों से



एक अपील भारत वासीयों से

इस समय देश नाजुक अवस्भा से गुजर रहा है। परिवार, समाज और सभी लोग नाजुक अवस्था में चल रहे हैं। हर मनुष्य घबराया हुआ है कि क्या होगा। ऐसे समय पर क्या करना है यह समझने की बात है। सभी बातें हम सब लोग मिल बैठ कर समझ लें तो समाधान हो सकता है। सब लोग यदि यह समझ लें कि सारा देश अपना है, देश के सब मनुष्य अपने हैं, देश का सामान अपना है तो जो दौर-दौरा चल रहा है उसमें एक रास्ता दिखाई दे।

हम भी कोशिश करेंगे कि आपके कर्मों को साफ करने की कोई विधी निकाली जाऐ और विधी निकाली जाऐगी पर आप मानोगे नही तो अपनी ही छुरी, अपनी ही तलवार से अपनी गर्दन कटेगी। महात्मा तो सबके होते हैं, सबको एक दृष्टि से देखते हैं। वे समदर्शी होते है। जो कोई भी व्यक्ति अधिकारी या और कोई हों, किसी प्रांत किसी शहर का हो उन सबके लिए मेरा सन्देश है, मेरी अपील है कि सरकार की बुराई ना करो क्योंकि इसके परिणाम अच्छे नहीं होते हैं। नहीं मानते हो तो अपना घर जला डालो, सामान जला डालो हम क्या कर सकते हैं। मानव हित के लिए, देश हित के लिए बहुत कुछ किया आपने पर उसका नतीजा अच्छा नही रहा। (1981) संकलन कर्ताः पिंकी

भारत की जनता परिश्रमी है


भारत की जनता परिश्रमी है

भारत की जनता परिश्रमी है, मेहनती है, हराम का खाना नहीं चाहती है। वह तो देना भी जानती है पर यह चाहती जरूर है कि कोई शूरवीर आऐ और हमसे कुछ ले ले पर हमारी सुरक्षा कर दे, हमें न्याय, रोटी और रोजी दे दे। हमें ऐसा निर्लोभी महात्मा मिल जाऐ जो हमें नीति और सदाचार सिखा दे। वीरों के उस जत्थे का इन्तजार जनता को करना पड़ेगा। उस जत्थे के बगैर अब देश का भला नहीं हो सकता। उनके आने पर ही जनता को सुख, चैन और आराम मिलेगा। फिर राम और कृष्ण की तरह उनकी पूजा हो जाऐगी। वक्त का इन्तजार है जिसे आप भी करें और मैं भी कर रहा हूॅ। (1975)

जब महात्मा मिल जाऐं उनसे भेद


जब महात्मा मिल जाऐं उनसे भेद

जब महात्मा मिल जाऐं उनसे भेद लेकर भजन में लग जाओ, गुरू में सच्ची आस्था, सच्चा विश्वास हो जाऐ, सच्चा प्यार हो जाऐ तो तुम साधना मे देखने लगोगे, सुनने लगोगे। अन्तर में चिदाकाश है उसी में चरण कंवल जड़ा हुआ है। उस पर दृष्टि जमाने में वह शीशा बन जाता है। उस दर्पण में वास्तविक रूप दिखाई देता है। इसी को ज्ञानियों ने आत्मदर्शी कहा है। यह छोटा मोटा आनन्द है सन्तमत में, पर ज्ञानियों के लिए यह बहुत बड़ा आनन्द है। सन्तमत में यह शुरूआत है, कोई महिमा नहीं। सन्त तो आपको बहुत कुछ देना चाहते हैं, लेकिन आप लेना ही नहीं चाहते।

जब वो नाराज हो जाऐं तो आपको क्या मिलेगा ? सन्तों को नाराज नहीं करना चाहिऐ, उनकी बात माननी चाहिऐ। यही वजह है कि घर घर में रामायण पढ़ा जाता है पर मिलता कुछ भी नहीं। मोहम्मद साहब को सबने नाराज कर दिया। उन्होंने कह दिया कि खड़े हो, उठो बैठो। मिलने वाला कुछ नहीं।पूजा इबादत तो एकान्त का है, शोर शराबे का काम क्या ?

तो सन्तों, पैगम्बरों को कभी नाराज नहीं करना चाहिए। सन्तों के पास तो सब कुछ है ,उनको किसी प्रकार की कोई कमी नहीं पर काल ने आपको बहका दिया और आपकी बुद्धि खराब हो गई। आप रोओगे, चिल्लाओगे, चीखोगे रोटी पानी नही मिलेगा, लोग लूटेंगे, हत्या करेंगे, फूंक फाक कर देंगे तब ये शब्द आपको एक एक करके याद आऐंगे।

अवतारी शक्तियों ने जन्म ले लिया है



अवतारी शक्तियों ने जन्म ले लिया है


भारतवर्ष में अवतारी शक्तियों ने जन्म ले लिया है और वो अनेक स्थानो पर बच्चों के रूप में पल रहीं हैं और समय आने पर प्रगट हो जाऐंगी। माता-पिता अपना सुधार करलें वर्ना यही बच्चे उनके विनाश का कारण बन जाऐंगे। इन बच्चों को गोश्त व अण्डा दिया जाता है तो वे मुह फेर लेते हैं ओर उधर देखते तक नहीं। मां-बाप इस बात का ध्यान रखें कि जो बच्चे इन सब चीजों को खाना नहीं चाहते हैं तो उन्हें जबरदस्ती न खिलाएं। उनके बारे में बताने का आदेश ऊपर से अभी नहीं हो रहा है। मैं समय का इन्तजार कर रहा हू और सभी महात्माओं ने समय का इन्तजार किया है। समय आते ही आप सब को मालूम हो जाऐगा। भारी परिवर्तन होगा, कोहराम मचेगा। अपनी-अपनी धर्म पुस्तकों को उठाकर देख लो कि उनमे क्या लिखा है। ऐसे वक्त में सुख और शान्ति फकीरों और महात्माओं के पास ही मिलेगी। (1971)

मुसीबतों की आंधी चलेगी। मानना न


मुसीबतों की आंधी चलेगी। मानना न

निरंजन भगवान ने मुझसे कहा कि महाराज जी अब आप चुप हो जाइऐ, अपना प्रचार बन्द कर दीजिए। पाप बहुत बढ़ गया है लोग मुझे ही नकारने लगे हैं। मैं बुरे लोगों को ठिकाने लगा दूगा। मैंने उनसे कहा कि थोड़ा मौका मुझे और दे दीजिए ताकि मैं इन सब लोगों को समझा लू। मेरी बात ये मान लेगें तो ठीक है नही तो आप की सृष्टि है जैसा चाहिएगा वैसा कीजिएगा। (1988-89) आगे भारत में ऐसी घटना होगी जिसकी चपेट में सारा विश्व आ जाऐगा। इतना बड़ा परिवर्तन होगा जिसकी तुम कल्पना भी नहीं कर सकते। कर्मफल सबको भोगना पड़ेगा। बुराइयों को छोड़कर आप लोग धर्म के रास्ते पर चल पड़ें तो इसमें आपकी भलाई है, आप बच जाऐंगे वर्ना मुसीबतों की आंधी चलेगी। मानना न मानना आपका काम। (2001)

धार्मिक लोग बचा लिए जाऐंगे।


धार्मिक लोग बचा लिए जाऐंगे।

जो लोग कानून बनाते हैं अगर वो खुद कानून का पालन नहीं करते हैं तो कभी भी आम आदमी आबाद नहीं हो सकता और लड़ाई झगड़े बढ़ जायेंगे। महात्मा जो कानून बनाते हैं तो खुद भी उसका पालन करते हैं और आपसे भी पालन करवाते हैं। जो कायदे कानून ऋषियों-मुनियों , महात्माओं ने बनाऐ आप उसके प्रतिकूल चलने लगे तो ऊपर बैठे दिव्य लोक में देवता जो इस सृष्टि का संचालन करते हैं वे सब नाराज हो गए हैं। आज हम उन नियमों के अनुकूल नहीं चल रहे हैं। वह तो महात्माओ का विशेष संकल्प है जो इस समय काम कर रहा है। अगर वो न होते तो न जाने अब तक क्या हो जाता। महात्मा किसी किस्म का तोड़-फोड़ नहीं कराते, आन्दोलन, हड़ताल नहीं कराते, मारा-मारी नहीं कराते। वे तो सबको प्यार मोहब्बत के सूत्र में बाधकर चलते हैं। अपने संकल्पों से वो क्या काम करते हैं किसी को नहीं मालूम। इतना जरूर है कि अब वक्त ज्यादा नहीं है और परिवर्तन जरूर होगा। धार्मिक लोग बचा लिए जाऐंगे। (जून 2008)

भारतवासी नर नारियां राष्ट्र भक्ति करें


भारतवासी नर नारियां राष्ट्र भक्ति करें

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के सिविल अस्पताल के मैदान में पचीसों हजार जनता को सम्बोधित करते हुए बाबाजी ने सन् 1971 में मुसलमान भाईयों से कहा था कि भारत की मिट्टी में पले और यहा का अन्न जल ग्रहण करने वाले मुसलमान केवल पाकिस्तान का ख्वाब न देखते रहें। यह तो राम, कृष्ण, कबीर और मौहम्मद की भूमि यहा के हिन्दु सबको प्यार करते हैं और तुम्हारी कब्रों को पूजते हैं। सभी भारतवासी नर नारियां राष्ट्र भक्ति करें । जो दशा पूर्वी पाकिस्तान की हो रही है वैसा ही नरसंहार पश्चिमी पाकिस्तान में होगा। फिर पाकिस्तान का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा। सब भारत हो जायेगा, तब आप कहा का ख्वाब देखोगे। भारत की मिट्टी में तो वह भी चीजें हैं, जो विश्व भर में नहीं हैं। भारत सदा से आध्यात्म का सिरमौर रहा है । भारत के कारण ही विश्वयुद्ध विभिन्न युगों में हुआ और इस युग में भी होगा। दुनियां के सारे देश मिलकर भारत पर आक्रमण करें तो भी इसको पराधीन नहीं बना सकते । भविष्य में तिब्बत और नेपाल स्वेच्छा से भारत में विलीन हो जायेंगे। दिव्य दृष्टि खोलकर, परमात्मा का, खुदा का दीदार दर्शन कराना तो मेरा काम ही है, पर इसके लिए आपके नैतिक चरित्रों को उठाना अनिवार्य है । -1971

अपने धर्म उपदेश के साथ-साथ



अपने धर्म उपदेश के साथ-साथ


मैं 4 अप्रैल 1971 को जब कलकत्ते से हवाई जहाज द्वारा रवाना हुआ तो बैंकाक रूका। दूसरे दिन मलेशिया में पेनंाग पहुचा। अपने धर्म उपदेश के साथ-साथ मैंने जो अनुभव किए उनमें से कुछ इस प्रकार हैं-
जा स्त्री चाय के बागानों में काम करती है उसको 6 डालर रोज मिलता है और पुरूष को 12 डालर। प्राइमरी स्कूल के 
अध्यापकों को 300 डालर माहवार मिलता है। पुलिस का सिपाही जब भर्ती होता है उसी दिन से उसको 270 डालर माहवार मिलता है। सब सिपाहियों को 6 वर्दी, 3 टोपी, दो जोड़ी जूता एक साल में मिलता है। मोटर सायकिल फ्री। पानी, बिजली, मकान सब फ्री। हर सिपाही के पास रिवालवर है।
मलेशिया का एक डालर भारत के 7 रूपये के बराबर है। कोई भी मजदूर चाहे वह स्त्री हो, पुरूष हो, चपरासी हो, सिपाही हो, अद्यापक हो या स्वीपर हो सबको कम से कम एक हजार रूपये से अधिक वेतन मिलता है।हर चीज बहुत सस्ती है और मजदूरी बहुत है। भारत में मजदूरी कम और महगाई अधिक से अधिक है। इसलिए भारत सदा गरीब रहेगा। आखिर वह भी तो मुल्क है, वहा भी तो इंसान रहते हंै। वहा की सम्पन्नता 10 वर्ष की तरक्की का नमूना है।
मैंने वहा के आदमियों से पूछा कि आपके देश में इतनी उन्नती क्यों है ? उन्होंने जवाब दिया कि हममें देश भक्ति है, हम समय की कीमत जानते हैं और किसी का समय नष्ट नहीं करते। हम अपने और देश के लिए काम करते हैं। भारत के पिछड़ेपन के बारे में जब पूछा तो वे बोले कि (1) भारत के लोगों में देश भक्ति नहीं है। (2) भारत के लोग ऊपर से नीचे तक सब चोर हैं। (3) भारत के हुकूमत करने वाले लोग जनता को खुशहाल नहीं होने देना चाहते हैं। (4) भारत के लोग मन में सोचते कुछ हैं, कहते कुछ हैं और करते कुछ और हैं। (5) वहा के लोगो का इतना पैसा यहा के बैंको में जमा है जिसका कोई हिसाब नहीं। 1971

सभी वर्ग के लोगों को यह सन्देश है




सभी वर्ग के लोगों को यह सन्देश है

सभी वर्ग के लोगों को यह सन्देश है कि सत्य का शंखनाद बज चुका है। एक दिव्य पुरूष का सन्देश सुनने को मिलेगा। अब समय आ गया है कि परिवर्तन होगा। बुरे लोगों के बुरे दिन होंगे और अच्छे लोगों के लिए अच्छा समय आऐगा। देश का उत्थान होगा, धर्म की क्रान्ति होगी और बहुत कुछ होगा। उक बार सचेत होकर उस दिव्य सन्देश को सुनो जो तुम्हें तुम्हारा ज्ञान कराता है, जो सत्य और असत्य का भेद बताकर तुम्हारा लक्ष्य दिखाता है, जो समय का ज्ञान कराकर देश का भविष्य सम्भालता है, जो अत्याचार से बचाकर प्रेम का पाठ पढ़ाता है। यह महापुरूष का सन्देश कि राष्ट्र की उन्नति समय के साथ चलकर होगी घर-घर, गली-गली, राज्य और पूरे देश में गूजेगा जिससे राष्ट्र द्रोही भक्त हो जाऐंगे, समय की अवहेलना करने वाले समय को जान जाऐंगे। तो अपना लो इस सत्य को क्योंकि तुम्हे देश के भविष्य का निर्माण करना है और तुम्हें समय के एक पल की कीमत अदा करनी है। अगर चाहते हो स्वाभिमान से जीना, तुम्हारा देश भूखे-नंगे और गरीबों से हटकर खुशहाल हो जाऐ तो व्रत धारण कर लो कि तुम निःस्वार्थ भाव से समय की लाज रखकर देश के भविष्य का निर्माण करेंगे। 1971

जन-जन में होगी क्रान्ति


जन-जन में होगी क्रान्ति

जन-जन में होगी क्रान्ति, हम तुम्हे दिख देंगे। रूढ़ि धर्म विवादों को, हम, मिटा के दिखा देंगे। मान अभिीमानियों के हम, मिटा के दिखा देंगे। जात-पात के जो झगड़े हैं, उन सबको मिटा के दिखा देंगे। प्रजा-राजा में न एकता, इन सबमें सबमें एकता करा देंगे। शराब, मास, मछली खाते-पीते, हम मना-मना के अवश्य छुड़ा देंगे। जिनको न शांति मिल सकी, उनको शांति दिला देंगे। यह बाबा जयगुरूदेव जी का संकल्प है यह तो पूरा होगा। लेकिन हमें अपने को बदलना पड़ेगा, उनके वचनों को सुनना होगा और उस पर अमल करना होगा। हम मानें न मानंे लेकिन यह सच है कि सन्त और फकीर त्रिकालदर्शी होते हैं। इसीलिए वे सबको सावधान करते हैं और बचने का रास्ता बताते हैं। हम मान लेंगे बच जाएंगे, नहीं मानेंगे तो खाई-खन्दक में गिरेंगे। अब हम सबके सामने दो ही रास्तेक हैं। हम बाबाजी की बात मानकर अपने को बचा लें या दैविक-भौतिक आपदाओं की की खाई-खन्दक में गिर कर अपना अस्तित्व खत्म कर दें। बाबा जी ने तो हमेशा से सबको बचाने का प्रयास किया और आज भी कर रहे हैं लेकिन नासमझी के कारण कभी उनको राजनैतिक कहा गया, कभी अराजक तत्व कहा गया, कभी असामाजिक तत्व कहा गया। कहने वाले कहते सुनते अपनी ही क्रिया-कर्म की तलवार से खत्म होते चले गऐ। बाबा जी शाश्वत हैं, आज भी उनकी वाणी सबको आगाह कर रही है। कि बच जाइऐ, समय ख्राब है, अपने बचाव का रास्ता अपनाइऐ, अमानुषिक काम छोड़ दीजिए, मानवता के काम कीजिए, जीवों पर दया कीजिए, पशु-पज्ञियों के खून को अपने खून में मत मिलाइऐ और थोड़ा समय निकाल कर अपनी जीवात्मा के कल्याण के लिए उस मालिक, उस खुदा से, गाॅड (हवकद्ध से सच्चे दिल से प्रार्थना कीजिए कि हे सर्व शक्तिमान प्रभु, मालिक, खुदा, अल्लाह या रब मेरी आत्मा को, रूह को (ेवनस को ) सच्चा रास्ता दिखा, जिस पर चलकर मैं अपना लोक-परलोक बना लू। अब वक्त है ऐसी सच्ची प्रार्थना करने का, धर्म और मजहब के नाम पर लड़ने कर नहीं, जाति-पाति के झगड़े का नहीं, निन्दा आलोचना का नहीं। हम बहुत लड़ लिए, झगड़े-फसादें कर लिए बहुत नुक्ताचीनी की। सिवाए नफरत के हमें मिला क्या ? नफरत की ऐसी ज्वाला जली कि इसमें घर-परिवार जल गऐ, जातियां और समाज जल गऐ, सारा देश जल उठा। इसीलिए सारी मानवता बहुत थक गई है अब हर कोई ऐसी छांव चाहता है जहा उसे ठंडक मिले, आराम मिले, शान्ति और सुकून मिले और यह सब वहीं मिलेगा जहा शान्ति के सन्देश होते हैं, मानव कल्याण के सन्देश होते हैं, मानव धर्म और मानव कर्म के सन्देश होते हैं और आत्माओं को, रूहों को जगाने के सन्देश होते हैं। ऐसे सन्देश वे सन्त-फकीर ही देते हैं जो समदर्शी हें और सब जीवों में उस प्रभु की अंश जीवात्मा को देखते हैं। सौभाग्य से वक्त का इतना बड़ा वरदान है कि बाबा जयगुरूदेव जैसी महान हस्ती सभी मानव आत्माओं का आहवान कर रीह है जो वक्त की मांग है, वक्त की पुकार है।अगर उनकी आवाज सुनकर भी हम अपने को न बचा सके, अपनी जीवात्मा का कल्याण न कर सके तो हमारा इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा।

1200 मील लम्बी सायकिल यात्रा


1200 मील लम्बी सायकिल यात्रा

मानव प्रेम, अहिन्सा जागरण हेतु वर्ष 1970 में बाबा जयगुरूदेव जी महाराज ने 1200 मील लम्बी सायकिल यात्रा निकाली जिसमें हजारों सायकिल यात्रियों ने गोल,लम्बी टोपी पहनकर,सायकिल पर जयगूरूदेव का झण्डा लगाकर भाग लिया था। जगह-जगह पड़ाव डालते हुऐ यात्री दिल्ली के रामलीला मैदान में रूके। दो-तीन दिन तक बाबाजी ने अपना सन्देश सुनाया और कहा कि बीस करोड़ नर-नरियों को जगा लेने दें। केवल आप अपनी सदभावना हम लोगों के साथ रखें। आगे रक्त रंजित नरसंहारकारी समय का संकेत हमे स्वपन में देखने को मिल रहा है। मुसलमान आपस में लड़ मरेंगे और बचे-खुचे लोगों की सहायता भारतवर्ष करेगा। मुसलमानी राष्ट्रों में भारी कलह व उपद्रव होगा। थोड़े ही समय में सारे मुसलिम राष्ट्र लड़ जाऐंगे और भारी नरसंहार होगा। ज्यादा वर्षा के कारण या कम वर्षा के कारण भूकम्प, बीमारी आदी कुदरत के प्रकोपों से जन जीवन त्रसित हो जाएगा। तमाम राष्ट्रों में तरह-तरह के विवाद खड़े हो जाऐंगे। इस महान नरसंहारकारी विभत्स परिस्थितियों से बचने के लिए आप निरामिष-शाकाारी हो जाऐं और साथ ही अपने को अनैतिक कार्यों से बचाएं और अपनी जीवात्मा को जगाकर परमात्मा तक पहुचाएं ताकि जन्म-मरण का चक्कर समाप्त हो जाऐ।आगे होने वाले 20 करोड़ नर-नारियों के जनजागरण की कतार में अपने को भी जोड़ लें। फिर आगे चलकर क्या होगा? दिल्ली से राजधानी हटेगी, राष्ट्रपति, प्रधानमन्त्री व अन्य मन्त्री मान्स मछली अण्डे शराब आदि नशीली वस्तुओं से मुकत होंगे। गाय काटना बन्द हो कर दिया जाऐगा, राष्ट्रभाषा हिन्दी और संस्कृत हो जाऐगी, परिवार नियोजन बन्दकर दिया जाऐगा, नंगे सिनेमा बन्द हो जाऐंगे, कोई भी अधिकारी रिश्वत नहीं लेने पाऐगा, उसको सब प्रकार की सुख-सुविधा प्रदान की जाऐगी, किसानों का पहले आधा कर्ज माफ कर दिया जाऐगा,। बहुत कुछ होगा। मेरी कोई बात भी कटने वाली नहीं है। वक्त का इन्तजार तो करना ही पड़ेगा। राम ने वक्त का इन्तजार किया, कृष्ण ने भी किया और मैं भी वक्त का इन्तजार कर रहा हॅंू। परिवर्तन होगा और भारी परिवर्तन होगा यह बात मानव बुद्धि के परे है। 1970

दिल्ली में झण्डा फहराया जा चुका है


 दिल्ली में झण्डा फहराया जा चुका है 

दिल्ली में झण्डा फहराया जा चुका है और नया अध्याय प्रारम्भ हो चुका है जो इसके इतिहास का अनूठा पृष्ठ बनेगा। धर्म की किरण यहां से फूट चुकी है। बाबा जयगुरूदेव जी ने सन 70 में दिल्ली के रामलीला मैदान में हजारों साईकिल यात्रियों के समक्ष कहा कि हमने 1972 तक देश में बीस करोड़ नर-नारियों का जागरण करने का व्रत लिया है। हमने शाकाहारी सदाचारी बनकर पुराने ऋषि-मुनियों व महात्माओं के आदर्शों की मशाल जलाकर पुनः विश्व में एक प्रकाश देना है नहीं तो एक एैसा भी समय आने वाला है जहां आदमी को आदमी उठाने वाला नहीं मिलेगा। बाबाजी ने अपने व्रत को दुहराया और कहा कि बिना किसी आंदोलन के देश में गऊ काटना बन्द हो जाऐगा, राष्ट्र भाषा हिन्दी और संस्कृत हो जाऐगी। जो कुछ भी मैं कहूगा वो सब देखने को मिलेगा। भविष्य में शासन की बागडोर धार्मिक लोगों के हाथों में चली जाएगी। मेरी सौ बातें पूरी होने पर देश खुशहाल हो जाएगा। भारत के ऊपर विदेशी शासन नहीं हो सकता, भारत अखण्ड राज्य होगा। ऐसा संभव हो सकता है कि दूसरे देश वाले यहां भारत में गोले बरसा दें जिससे नई-नई बिमारियां फैल जाऐं और करोड़ों लोग मर जाऐं। ऐसा भी हो सकता है कि सभी लोग आपस में लड़ जाऐं और काफी जन संख्या समाप्त हो जाए या भूचाल आऐ और इमारतें 40-50 फीट ऊपर आसमान में उछल जाऐं और लोग दबकर मर जाऐं। यह सभी कुछ संभव है परन्तु अब भारत के ऊपर किसी दूसरे देश का शासन नहीं हो सकता। भारत राम और कृष्ण की भूमि है। इस तपोभूमि में रहकर जो लोग आतंक पैदा करेगंे, अन्याय करेंगे, जनता के पैसों को औतिक रूप से जमा करसुख और आराम की कल्पना करेंगे, मास, मछली, अण्डा, शराब का सेवन करेंगे उनके लिए आगे एक ऐसा समय आ रहा है कि आदम िको आदमी उठाने वाला नहीं मिलेगा। जो तकलीफें आगे आ रही हैं उन्हें कोई मेट नहीं सकता। अगर पृथ्वी के कण-कण में सोना बरसा दिया जाऐ तब भी लोगों को सुख नहीं मिलेगा। यह तकलीफ व्यक्तिगत रूप से होगी और कर्मानुसार होगी। 1970

दिल्ली की गद्दी पर बैठकर कोई भी


 दिल्ली की गद्दी पर बैठकर कोई भी 

दिल्ली की गद्दी पर बैठकर कोई भी माइकालाल भारत की जनता को सुखी नहीं कर सकता। इस भूमि पर सदा ही अत्याचार-अनाचार हुये हैं और यह भूमि का असर है कि लोगों के आचार-विचार ठीक नहीं रह सकते। बुि में विवेक नहीं रह सकता और वह जनता की भलाई का कोई भी काम नहीं कर सकते। इस भूमि में बैठकर सेवा, त्याग, समानता, पे्रम को नहीं पाया जा सकता। इस नगरी में प्रवेश करते ही मनुष्य विचार बदल जाते हैं और वादा कुछ करता है और करता कुछ है। इसमें किसी का दोष नहीं। त्रेता युग में श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को जब कन्धे पर लादकर भारत के तीर्थ स्थानों की यात्रा करा रहे थे तो घूमते-घूमते दिल्ली ;इन्द्रप्रस्थद्ध नगरी में यमुना के किनारे पहुंचे। इनकी सेवा, त्याग, प्रेम, मातृ-पितृ भक्ति का इतिहास है जिसकी चर्चा आज भी लोग किया करते हैं। यमुना के तट पर उन्होंने कांवर को कन्धे से उतारा और उसमें बैठे हुए माता-पिता से बोला कि मैं बहुत थक गया हूं। मेरी हिम्मत नहीं है कि मैं आप लोगों को और आगे ले चलूं। पिता ने पूछा कि बेटा हम लोग कहां पर हैं? श्रवण कुमार ने कहा कि यमुना के किनारे हैं और दिल्ली में प्रवेश कर चुके हैं। पिता ने कहा कि बेटा मेरा इतना कहा और मान लो, और हमें दिल्ली के पार मथुरा के रास्ते पर हमें छोड़ देना। श्रवण कुमार ने सोचा कि अब तक इतनी सेवा जान लगाकर की है तो इस आखिरी बात को क्यों न मान लिया जाए और वे फिर चल पड़। चलते-चलते वो कुछ बोलते जाते थे किन्तु मां-बाप चुप थे। कुछ देर बार चाल में कुछ तेजी आई तो पिता ने पूछा कि बेटा हम लोग अब कहां हैं? श्रवण कुमार ने जवाब दिया कि दिल्ली को पार करके मथुरा की ओर चल रहे हैं। पिता ने कहा बेटा अब तुम हम लोगों को यही छोड़ दो। बेटे ने विनीत भाव से जवाब दिया कि पिताजी मुझे जरा भी थकावट नहीं है और मथुरा पहुंचकर ही विश्राम करूंगा। मां-बाप ने सोचा कि अरे दिल्ली की भूमि का यह असर जिसने हमारे आदर्श बेटे के विचारों में क्रान्तिकारी परिवर्तन कर दिया। फिर उन लोगों का क्या हाल होगा जो दिन-रात रहते हैं। बाबा जयगुरूदेव ने आगे कहा कि अब आप लोग सोच लो।

आगे विश्व में परिवर्तन होगा


  आगे विश्व में परिवर्तन होगा  

हमारा काम जनजागरण का बड़ी तेजी से चल रहा है और लोग देख रहे हैं, आगे विश्व में परिवर्तन होगा । लोगों को शाकाहारी, सदाचारी बनना होगा। तोड़फोड़, हड़ताल, निन्दा एवं अनशनों से अलग रहकर अपनी भूली हुई आत्मा को परमात्मा तक पहुचायें और आने वाले महान भयंकर और भयावह नरसंहारकारी समय से होशियार हो जायें। अगर आप ऐसा नहीं करंगे तो एक समय ऐसा भी आने वाला है, कि आदमी की लाश उठाने के लिए आदमी नहीं मिलेगा। लाशों पर लाशों का नजारा मिलेगा सभी राष्टों में भारी कलह रहेगी। मुसलमान आपस में लड़ जायेंगे, कुदरत के प्रकोप अलग होंगे। ऐसा भारी परिवर्तन होगा जो अभी किसी के दिल दिमाग में भी नहीं है। - 1971

आगे भारी परेशानियां आयेंगी


   आगे भारी परेशानियां आयेंगी   

बाबाजी ने अप्रैल 1971 में मलेशिया सिंगापुर आदि स्थानों की यात्रा की। पिनांग में अपना संदेश सुनाते हुए कहा कि अगद दुनियां के लोग धर्म की तरफ नहीं मुड़ते हैं तो आगे भारी परेशानियां आयेंगी, चाहे जमीन से आये या आसमान से आ जायें, चाहे पूरब से आयें या पश्चिम से आ जायें, लेकिन परेशानियां आयेंगी जरूरी और कोई इसे रोक नहीं सकता है। मलेशिया और सिंगापुर यात्रा के अनुभव सुनाते हुए उन्होंने कहा कि वहा की जनता में असीम राष्ट्र प्रेम है भारत के सम्बन्ध में वहा के निवासियों से पूछे जाने पर उन्हेने बताया कि भारत वासियों में राष्ट्रभक्ति नहीं है, वह एक चोरों का देश है और यही कारण है कि इतना विशाल देश होते हुए भी वह आत्मनिर्भर नहीं हो पाया है। बाबाजी ने कहा कि उन्हें बताया गया कि भारत के लोगों का इतना पैसा वहा के बैंकों में जमा है कि अगर बता दिया जाये तो आखों से आंसू निकल आयें। अगर वो पैसा भारत में मॅंगा लिया जाये और लोग मेहनत ईमानदारी से काम करें तो पाच वर्षों के अन्दर भारत चमन बन सकता है। हिन्दुस्तान गरीब देश बिल्कुल नहीं है, इसे वहा के लेागेा ने गरीब बना रखा है। आगे समय में सारे विश्व में एक जनसंहार क्रान्ति होगी, जिसमें दुनियां की आबादी घटकर बहुत कम रह जायेगी। सारे विश्व के लेाग धर्म को मानने के लिए बाध्य होंगे और अमरीका और इग्लैण्ड के नर नारी भारत में हरे राम-हरे कृष्ण का कीर्तन करते मिलेंगे, पुरुष हिन्दुओं की तरह चोटी रखेंगे और स्त्रियां भारतीय नारियों की तरह साड़ियां पहनेंगी। भारत की तरह सभी देशों के लोग शाकाहारी बनेंगे। मैं सन् 1972 तक भारत में 20 करोड़ नर नारियों का जागरण कर दूगा जो प्रेम, सेवा, धर्म और ईश्वर भक्ति में विश्वास करेंगे और भारतीय संस्कृति की ध्वजा ऊची करेंगे। मैं लोगों को नामदान "दीक्षा" देकर सबसे भजन कराऊँगा और जीवात्माओं को स्वर्ग, वैकुण्ठ, विष्णुलोक, साकेत लोग, गौलोक में पहुचाऊगा। मरने के पहले ही ईश्वर का, खुदा का, गाॅड का दीदार होता है । जीवात्मा की आख, तीसरा नेत्र "थर्ड आई" खुला है। लेकिन शर्त यह है कि आपको मास, मछली, शराब का सेवन छोड़करके रोज दो-तीन घण्टे ईश्वर की प्राप्ति के लिए साधना "मैडीटेशन" में समय देना होगा।

सम्वत दो हजार के उपर ऐसा योग आएगा

   सम्वत दो हजार के उपर ऐसा योग आएगा   

महात्माओं ने जो वाणिया लिखी वो सब अपनी-अपनी जगह पर सही हैं पर उनका भेद भाव जब लोग भूल गए तो वहां केवल किताब ही किताब रह गई। अब कोई समझाने वाला नहीं रहा। जब उनके सामने कोई समझाने वाला आ जाए तो वो लोग कहते हैं कि हमें तो ऐसे किसी ने समझाया ही नहीं। कृष्ण ने कहा कि जब-जब धर्म की हानि होती है तब-तब धर्म के उत्थान के लिए कोई शक्ति मानव शरीर धारण करती है फिर अधर्म का नाश करती है और धर्म की स्थापना करती है। महापुरूष त्रिकालदर्शी होते हैं। सूरदासजी ने कई सौ साल पहले कह दिया कि ’सम्वत दो हजार के उपर ऐसा योग आएगा कि चारों तरफ अकाल पड़ेगा, मारामारी होगी और भयंकर समय हो जाएगा लेकिन ऐसे समय में वहीं लोग बचेंगे जो गुरू का ध्यान करेंगे और फिर सतयुग आएगा। राज नियम तो बदलते रहते हैं लेकिन धर्म के नियम नहीं बदलते। वह सनातन हैं, शास्वत हैं। धर्म के नियम जब टूटते हैं तब अव्यवस्था फैल जाती है क्योंकि धर्म मानव-मानव से जुड़ा हुआ है। राज नियम हत्या को कानूनी रूप दे दे तो आप यहा सजा से बचोगे लेकिन ईश्वरीय नियम में यह पाप है। आप जब उसके दरबार में खड़े किए जाऐंगे तो वह फैसला अपने नियमके अनुसार देगा। वह राजे महाराजे,मंत्राी-मिनिस्टर किसी को भी नही बख्शेगा। भारत एक आध्यात्मिक देश है। यहां की विभूतिया विश्व को नचाया करती थीं। महाभारत में कृष्ण ने विश्व के योद्वाओं को लड़ाकर कुरूक्षेत्र के मैदान में साफ करा दिया। आगे भी ऐसा ही होगा। दुनियां के तमाम देश मिलकर अपने आणविक हथियारों के साथ यदि भारत पर हमला कर दे तो फिर भी वो जीत नहीं पाऐंगे। 2003

कुदरत है और वो पलक मारते ही कुछ


कुदरत है और वो पलक मारते ही कुछ

कुदरत है और वो पलक मारते ही कुछ का कुछ कर सकती है, यह उसकी सृष्टि है, उसके तुम ठेकेदार मत बनो। उसके नियमों के अनुकूल चलोगे तो वो हमेशा तुम्हारा साथ देगी और विपरीत चलने पर उसे पलटने में देर नहीं लगेगी। तुम भागकर कहीं भी जाओ, मौत तुम्हारा पीछा कर रही है। सच्चा हिन्दु वह है, जिसमें दया है, प्रेम है, सेवा है, सत्यता है। सच्चा मुसलमान वह है, जिसके पास ईमान और रहम है, सच बोलता है, मेहनत मशक्कत की कमाई करता है। शराब की बूद का एक कतरा भी नहीं लेता और रूहों को कत्ल नहीं करता। वक्त सबके लिए नाजुक है, तुम्हारी अन्दर की आख यानि तीसरी आख खुलते ही स्वर्ग दिखाई देगा और मुसलमानों को बहिष्ट। जीते जी तुम प्रभु को पा लोगे, वरना मरने के बाद कुछ नहीं मिलने वाला है। अगर तुमने मेरी बातों पर ध्यान नहीं दिया और मनमानी करते रहोगे तो आगे एक ऐसा भयंकर समय आयेगा जिसे तुम आज सोच भी नहीं सकते हो, यह तो लोग कहेंगे, और लिख देंगे कि ऐसा समय इतिहास में कभी नहीं आया, खुंरेजी का। भारत में एक ऐसी घटना होगी, जिसकी चपेट में सारा विश्व आ जायेगा। भारी कोहराम मचेगा, हमें तो आपको मनाना है आप मान जाओगे तो आपको आराम मिलेगा, सुख मिलेगा और सारी व्यवस्था अपनी जगह पर आ जायेगी। अगर आपने नहीं माना, नहीं समझा तो बहुत बुरे दिन देखने को मिलेंगे। 1993-94..