Monday, 15 July 2013

भारत की जनता परिश्रमी है


भारत की जनता परिश्रमी है

भारत की जनता परिश्रमी है, मेहनती है, हराम का खाना नहीं चाहती है। वह तो देना भी जानती है पर यह चाहती जरूर है कि कोई शूरवीर आऐ और हमसे कुछ ले ले पर हमारी सुरक्षा कर दे, हमें न्याय, रोटी और रोजी दे दे। हमें ऐसा निर्लोभी महात्मा मिल जाऐ जो हमें नीति और सदाचार सिखा दे। वीरों के उस जत्थे का इन्तजार जनता को करना पड़ेगा। उस जत्थे के बगैर अब देश का भला नहीं हो सकता। उनके आने पर ही जनता को सुख, चैन और आराम मिलेगा। फिर राम और कृष्ण की तरह उनकी पूजा हो जाऐगी। वक्त का इन्तजार है जिसे आप भी करें और मैं भी कर रहा हूॅ। (1975)

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