Monday, 15 July 2013
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बाबा जी का कहना हैं ,शाकाहारी रहना हैं। तन मन करता कौन ख़राब ! अंडा,मछली,मांस,शराब। क्या खाने से होगी भलाई ! साग,सब्जी,दूध,मलाई। कुदरत हैं तैयार खड़ी ! आगे तबाही बड़ी-बड़ी। बाबा जी की अर्जी हैं ! आगे आप की मर्जी है।
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