Monday, 15 July 2013

राम ने बाली को बहुत समझाया


राम ने बाली को बहुत समझाया


राम ने बाली को बहुत समझाया था पर जब वो नहीं माना तो क्या हुआ इतिहास साक्षी है। मन्दोदरी ने रावण को बहुत समझाया कि राम भगवान हैं उन्हें तुम इन्सान मत समझो पर रावण ने अपने अहंकार में नहीं समझा तो क्या हुआ ये सब लोग जानते हैं। भस्मासुर ने भगवान शंकर से ही वरदान लिया था कि जिसके सिर पर हाथ रखेगा वह जल जाऐगा। उसको ये वरदान मिला तो उसने शंकर भगवान के सिर पर ही हाथ रखने की कौशिश की लेकिन अपने अहंकार , मोह में और काम के वशीभूत अपने ही सिर पर हाथ रख लिया और अपना अन्त कर दिया।राम ने जब रामेश्वरम में शिव की स्थापना की तो ब्राहमण होने के कारण रावण को भी बुलाया। रावण विद्वान था, वह जानता था कि बिना सीता के गए राम की पूजा नहीं होगी। इसलिए वह सीता को लेकर गया। राम ने ब्राहमण अतिथी के रूप में रावण के पैर पूजे। रावण ने राम को आशीर्वाद दिया कि तुम अजेय होगे, तुम्हें कोई जीत नहीं सकता।अगर कोई अपनी कुल्हाड़ी से अपना ही पैर काट ले तो क्या कर सकते हैं राम, क्या कर सकते हैं महात्मा?

ईसा मसीह के साथ अन्त में सात शिष्य खड़े थे। जिस समय उनको शूली पर चढ़ाया जाने लगा तो सब शिष्य खड़े थे। उनसे पूछा गया कि तुम ईसा मसीह को जानते हो ,तो सब इन्कार कर गऐ। अगर किसी एक ने भी कह दिया होता कि मैं जानता हू तो आज उसके गिर्जाघर बन गऐ होते, उसकी पूजा हो गई होती। मैंने कहा था कि मुसलमान आपस में लडंेगे वो स्थिती सामने आती जा रही है। जो कुछ भी कहा है वो सब आपको देखने को मिलेगा। (1981)

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